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Monday, 19 June 2017

मानसिक कमजोरी और मनोरोगों में रामबाण है नारियल तेल – दिखाता है तुरंत प्रभाव







नारियल तेल सिर्फ साधारण तेल ना होकर आज सम्पूर्ण चिक्तिसा जगत में एक अहम् भूमिका निभा रहा है. जो काम ओलिव oil, केनोला oil, सोयाबीन oil, फिश एंड कॉड लीवर oil, कॉर्न oil, मूंगफली का तेल नहीं कर सकते वो काम सिर्फ नारियल तेल ही कर सकता है. इन तेलों में MCT अर्थात Medium Chain Triglyceride नहीं पाया जाता. MCT हमारे लीवर में जाकर Ketone body में तब्दील हो जाता है और ये Ketone Body हमारे दिमाग के Barriers को Cross करके दिमाग की कोशिकाओं के लिए उस समय Nutrition उपलब्ध करवाता है जब दिमाग में ग्लूकोस की सप्लाई कम हो जाती है. जिस से ब्रेन के सेल्स Damage होना शुरू हो जाते हैं. क्यूंकि उनको Energy नहीं मिल पाती. और तब हम मानसिक कमजोरी का सामना करते हैं और इनकी मात्रा अगर कम होती जाती है तो जैसे जैसे उम्र बढती है लोगों को अनेक मनो रोग घेर लेते हैं जैसे Alzheimer’s, Parkinson’s, Dementia, Low Memory इत्यादि. आइये जाने इस पुरे चक्र को और इस को तुरंत प्रभाव से खत्म करने के उपाय.

क्या है MCT ? What is MCT (Medium Chain Triglyceride)

MCT अर्थात Medium Chain Triglyceride एक प्रकार के फैट है जो के हमारे दिमाग के लिए अमृत के समान है. जब व्यक्ति का दिमाग काम करना बंद या कम काम करता है जिस से कुछ दिमाग से सम्बंधित रोग हो जाते हैं जैसे Alzheimer’s, Parkinson’s, Dementia (एक प्रकार का पागलपन), याददाश्त कमजोर होना, ऐसे रोगों के लिए MCT एक अहम् भूमिका निभाता है, हम जो कुछ भी खाते हैं उसको शरीर में Dissolve होने में और उससे निकलने वाले पोषक तत्व किसी अंग को इतनी जल्दी नहीं मिल पाते जितनी जल्दी MCT दिमाग को एनर्जी दे कर इसकी कार्य क्षमता बढ़ा देता है. ये लीवर में जैसे ही पहुँचता है कुछ ही मिनट में टूटकर Ketone body बना देता है, और ये Ketone body दिमाग के सभी Barrier (BBB – Blood Brain Barrier) को बाय पास करके तुरंत Nutrition देते हैं, ये Barrier दिमाग के लिए इतने महत्वपूर्ण होंते हैं के ये सिर्फ कुछ Selective रसायनों को ही दिमाग में प्रवेश करने की आज्ञा देते हैं. और ये Ketone Body जैसे ही दिमाग में पहुँचते हैं रोगी को तुरंत प्रभाव मिलता है. इसी कारण से जिस भी चीज में MCT अधिक पाए जाते हैं वो दिमाग के लिए अमृत के समान होते हैं और ये दिमागी रोगियों के लिए रामबाण का काम करते हैं.

कब बनते है Ketone Body

जब दिमाग में ग्लूकोस की सप्लाई कम हो जाती है, जैसा के Insulin Resistance में होता है, उस समय दिमाग की कोशिकाओं (Neurone) की एनर्जी की ज़रूरत को पूरा करने के लिए लीवर शरीर में मौजूद MCT को तोड़कर Ketone Body में कन्वर्ट कर देता है. ये ब्रेन को तुरंत एनर्जी देने का काम करते हैं. जिस से Neuron सही तरीके से काम करना शुरू कर देते हैं.

कितनी हो नारियल तेल की मात्रा.

अगर आप नारियल तेल इस्तेमाल कर रहें हैं तो इसकी मात्रा पुरे दिन में 40 मिली तक होनी चाहिए. अगर आपको इतनी मात्रा से दस्त की समस्या हो तो आप इसकी मात्रा को कम कर सकते हैं. शुरू में एक चम्मच अर्थात 5 मिली खाने के साथ दिन में दो से तीन बार में लीजिये, और जैसे जैसे शरीर इसको पचाना शुरू कर दे तो आप इसकी मात्रा को बढ़ाएं.

दिमाग को बनाये कंप्यूटर जैसा

नारियल तेल का उपयोग करने से हमारा दिमाग बहुत ही तेज़ काम करना शुरू करता है. ऐसे में ये अगर नियमित खुराक बन जाए तो बच्चों और बड़ो का दिमाग कंप्यूटर जैसा तेज़ बना देता है.

हार्ट के लिए भी है ये फायदेमंद.

नारियल तेल कोलेस्ट्रॉल Ratio को बढाता है, जिस कारण से ये हार्ट के लिए भी फायदेमंद है. आप कोलेस्ट्रॉल Ratio के लिए अधिक जानकारी के लिए हमारी ये पोस्ट पढ़ सकते हैं.

बरसेगा इतना पैसा के संभाल नही पाओगे अगर घर में ऐसे लटका देंगे फिटकरी का एक टुकड़ा!


बरसेगा इतना पैसा के संभाल नही पाओगे अगर घर में ऐसे लटका देंगे फिटकरी का एक टुकड़ा

फिटकरी से वास्तु दोष दूर करने का उपाय

भारतीय जीवन शैली में फिटकरी का यदा कदा उपयोग होता ही आता है. शेविंग के बाद लगाने के लिए, या कटे पर लगाने के लिए, खांसी में इसके फूला बना कर खाने के लिए या फिर दांत दर्द में इसके बेहतरीन प्रयोग के लिए. मगर आज हम आपको इसका एक ऐसा वास्तु सम्बंधित उपयोग बताने जा रहें हैं जिस को अपना कर आप घर में वास्तु दोषों के कारण आई हुयी आर्थिक समस्याओं या क़र्ज़ की समस्याओं से छुटकारा पा सकते हैं. तो आइये जानते हैं ये प्रयोग.

वास्तु दोष दूर करने का तरीका

फिटकरी के उपाय को करने से आपके दुकान ऑफिस या व्यापार में तरक्की क्या योग बनेंगे यदि आपको लगता है कि लाभ प्रयास के बावजूद भी आप का व्यापर आगे नहीं बढ़ रहा कोई ना कोई रुकावट आ रही है या फिर कही पैसा फंसा हुआ है।
50 ग्राम फिटकरी का टुकड़ा घर के प्रत्येक कमरे में तथा कार्यालय के किसी कोने में अवश्य रखना चाहिए। इससे वास्तुदोषों से रक्षा होती है।
यदि आपके घर में या कारोबार में बर‍कत नहीं हो रही तो फिटकरी का टुकड़ा दुकान या घर के मुख्य द्वार पर काले कपड़े में बाँधकर लटकाने से बरकत आती है। नजर दोष व नकारात्मकता दूर होती है।
यदि कर्ज से परेशान है तो थोड़ी मात्रा में फिटकरी को ले और इसे पान के टुकड़े में सिंदूर के साथ बांध दे, बांधने के लिए आप कलेवे का भी इस्‍तेमाल कर सकते हैं। अब आप शाम के समय इसे पीपल के पेड़ के नीचे पत्‍थर या मिटी के नीचे दबा दें।
ऊपर के तीनो उपायों को फिर से पढ़ लीजिये, और इन उपायों को ज़रूर कर के देखिये.

भूने चने के साथ गुड़ खाने से मर्दों को मिलतें हैं ये 8 बेमिसाल फायदे!!



भूने चने के साथ गुड़ खाने से मर्दों को मिलतें हैं ये 8 बेमिसाल फायदे

भूने चने खाने से सेहत को काफी फायदा होता है लेकिन जब इनके साथ गुड़ का भी सेवन करें तो यह शरीर के लिए बहुत फायदेमंद साबित होते हैं। मर्दों के लिए इसे खाना काफी बढ़िया होता है। अक्सर पुरूष बॉडी बनाने के लिए जिम में जाकर कसरत करते हैं ऐसे में उन्हें गुड़ और चने का सेवन जरूर करना चाहिए। इससे मसल्स मजबूत होते हैं और शरीर को भी कई फायदे मिलते हैं।

1- मसल्स बनाने के लिए

गुड़ और चने में काफी मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है जो मसल्स को मजबूत बनाने में मदद करता है। मर्दों को हर रोज इसका सेवन करना चाहिए।

2- चेहरा निखारने के लिए

इसमें जिंक होता है जो त्वचा को निखारने में मदद करता है। मर्दों को रोजाना इसका सेवन करना चाहिए जिससे उनके चेहरे की चमक बढ़ेगी और वे पहले से ज्यादा स्मार्ट भी लगेेंगे।

3- मोटापा कम करने के लिए 

गुड़ और चने को एक साथ खाने से शरीर का मैटाबॉलिज्म बढ़ता है जो मोटापा कम करने में मदद करता है। कई मर्द वजन कम करने के लिए जिम जाकर एक्सरसाइज करते हैं उन्हें गुड़ और चने का सेवन जरूर करना चाहिए।

4- कब्ज दूर करने के लिए 

शरीर का डाइजेशन सिस्टम खराब होने की वजह से कब्ज और एसिडिटी की समस्या हो जाती है। ऐसे में गुड़ और चने खाएं, इसमें फाइबर होता है जो पाचन शक्ति को ठीक रखता है।

5- दिमाग तेज़ करने के लिए

गुड़ और चने को मिलाकर खाने से दिमाग तेज होता है। इसमें विटामिन-बी6 होता है जो याददाश्त बढ़ाता है।

6- दांत मज़बूत करने के लिए 

इसमें फॉस्फोरस होता है जो दांतो के लिए काफी फायदेमंद है। इसके सेवन से दांत मजबूत होते हैं और जल्दी नहीं टूटते।

7- हार्ट के लिए 

जिन लोगों को दिल से जुड़ी कोई समस्या होती है। उनके लिए गुड़ और चने का सेवन काफी फायदेमंद है। इसमें पोटाशियम होता है जो हार्ट अटैक होने से बचाता है।

8- हड्डियां मज़बूत करने के लिए 

गुड़ और चने में कैल्शियम होता है जो हड्डियों को मजबूत करता है। इसके रोजाना सेवन से गठिया के रोगी को काफी फायदा होता है।

Tuesday, 13 June 2017

जानिए किस धातु के बर्तन में भोजन करने से क्या क्या लाभ और हानि होती है।



 दोस्तों आज के इस लेख में हम आपको  बता रहे हैं दोस्तों हर एक धातु का अपना एक गुण होता है । दोस्तों जिस धातु के बर्तन में हम खाना खाते हैं उस धातु के गुण हमारे खाने के साथ ही हमारे शारीर में प्रवेश करते है ।वैसे तो इस विषय पर जितना लिखा जाए कम है लेकिन आइये अब आपको हम कम समय में ही बता रहे हैं ।
सोना
सोना एक गर्म धातु है। सोने से बने पात्र में भोजन बनाने और करने से शरीर के आन्तरिक और बाहरी दोनों हिस्से कठोर, बलवान, ताकतवर और मजबूत बनते है और साथ साथ सोना आँखों की रौशनी बढ़ता है।
चाँदी
चाँदी एक ठंडी धातु है, जो शरीर को आंतरिक ठंडक पहुंचाती है। शरीर को शांत रखती है इसके पात्र में भोजन बनाने और करने से दिमाग तेज होता है, आँखों स्वस्थ रहती है, आँखों की रौशनी बढती है और इसके अलावा पित्तदोष, कफ और वायुदोष को नियंत्रित रहता है।
कांसा
काँसे के बर्तन में खाना खाने से बुद्धि तेज होती है, रक्त में शुद्धता आती है, रक्तपित शांत रहता है और भूख बढ़ाती है। लेकिन काँसे के बर्तन में खट्टी चीजे नहीं परोसनी चाहिए खट्टी चीजे इस धातु से क्रिया करके विषैली हो जाती है जो नुकसान देती है। कांसे के बर्तन में खाना बनाने से केवल ३ प्रतिशत ही पोषक तत्व नष्ट होते हैं।
तांबा
तांबे के बर्तन में रखा पानी पीने से व्यक्ति रोग मुक्त बनता है, रक्त शुद्ध होता है, स्मरण-शक्ति अच्छी होती है, लीवर संबंधी समस्या दूर होती है, तांबे का पानी शरीर के विषैले तत्वों को खत्म कर देता है इसलिए इस पात्र में रखा पानी स्वास्थ्य के लिए उत्तम होता है. तांबे के बर्तन में दूध नहीं पीना चाहिए इससे शरीर को नुकसान होता है।
पीतल
पीतल के बर्तन में भोजन पकाने और करने से कृमि रोग, कफ और वायुदोष की बीमारी नहीं होती। पीतल के बर्तन में खाना बनाने से केवल ७ प्रतिशत पोषक तत्व नष्ट होते हैं।
लोहा
लोहे के बर्तन में बने भोजन खाने से शरीर की शक्ति बढती है, लोह्तत्व शरीर में जरूरी पोषक तत्वों को बढ़ता है। लोहा कई रोग को खत्म करता है, पांडू रोग मिटाता है, शरीर में सूजन और पीलापन नहीं आने देता, कामला रोग को खत्म करता है, और पीलिया रोग को दूर रखता है. लेकिन लोहे के बर्तन में खाना नहीं खाना चाहिए क्योंकि इसमें खाना खाने से बुद्धि कम होती है और दिमाग का नाश होता है। लोहे के पात्र में दूध पीना अच्छा होता है।
स्टील
स्टील के बर्तन नुक्सान दायक नहीं होते क्योंकि ये ना ही गर्म से क्रिया करते है और ना ही अम्ल से. इसलिए नुक्सान नहीं होता है. इसमें खाना बनाने और खाने से शरीर को कोई फायदा नहीं पहुँचता तो नुक्सान भी नहीं पहुँचता।
एलुमिनियम
एल्युमिनिय बोक्साईट का बना होता है। इसमें बने खाने से शरीर को सिर्फ नुक्सान होता है। यह आयरन और कैल्शियम को सोखता है इसलिए इससे बने पात्र का उपयोग नहीं करना चाहिए। इससे हड्डियां कमजोर होती है. मानसिक बीमारियाँ होती है, लीवर और नर्वस सिस्टम को क्षति पहुंचती है। उसके साथ साथ किडनी फेल होना, टी बी, अस्थमा, दमा, बात रोग, शुगर जैसी गंभीर बीमारियाँ होती है। एलुमिनियम के प्रेशर कूकर से खाना बनाने से 87 प्रतिशत पोषक तत्व खत्म हो जाते हैं।
मिट्टी
मिट्टी के बर्तनों में खाना पकाने से ऐसे पोषक तत्व मिलते हैं, जो हर बीमारी को शरीर से दूर रखते थे। इस बात को अब आधुनिक विज्ञान भी साबित कर चुका है कि मिट्टी के बर्तनों में खाना बनाने से शरीर के कई तरह के रोग ठीक होते हैं। आयुर्वेद के अनुसार, अगर भोजन को पौष्टिक और स्वादिष्ट बनाना है तो उसे धीरे-धीरे ही पकना चाहिए। भले ही मिट्टी के बर्तनों में खाना बनने में वक़्त थोड़ा ज्यादा लगता है, लेकिन इससे सेहत को पूरा लाभ मिलता है। दूध और दूध से बने उत्पादों के लिए सबसे उपयुक्त हैमिट्टी के बर्तन। मिट्टी के बर्तन में खाना बनाने से पूरे १०० प्रतिशत पोषक तत्व मिलते हैं। और यदि मिट्टी के बर्तन में खाना खाया जाए तो उसका अलग से स्वाद भी आता है।
पानी पीने के पात्र के विषय में ‘भावप्रकाश ग्रंथ’ में लिखा है….
जलपात्रं तु ताम्रस्य तदभावे मृदो हितम्।
पवित्रं शीतलं पात्रं रचितं स्फटिकेन यत्।
काचेन रचितं तद्वत् वैङूर्यसम्भवम्।
(भावप्रकाश, पूर्वखंडः4)
अर्थात् पानी पीने के लिए ताँबा, स्फटिक अथवा काँच-पात्र का उपयोग करना चाहिए। सम्भव हो तो वैङूर्यरत्नजड़ित पात्र का उपयोग करें। इनके अभाव में मिट्टी के जलपात्र पवित्र व शीतल होते हैं। टूटे-फूटे बर्तन से अथवा अंजलि से पानी नहीं पीना चाहिए।
इसलिए मित्रो हमारी हजारो  वर्ष पुराणी संस्कृति को मत छोड़िए और अपने दोस्तों को भी इस पोस्ट को शेयर कर के बताइए और अगर पोस्ट से सम्बंधित कोई सवाल है तो आप हमें कोम्मेंट के द्वारा पूछ सकते हैं ।

Saturday, 10 June 2017

Ashwagandha: Find Out How The Ayurvedic Herb Can Treat Insomnia And Your Other Sleeping Woes




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Ashwagandha: Find Out How The Ayurvedic Herb Can Treat Insomnia And Your Other Sleeping Woes
In the event that you are even somewhat mindful of Ayurveda, you may have known about the herb, 'Ashwagandha'.
"Ashwagandha" truly means "possess an aroma similar to horse" in Sanskrit. It was expended customarily to pick up steed like quality and essentialness in India.For hundreds of years, Ayurvedic drug has utilized the decency of ashwagandha to treat individuals for their every day burdens, for example, stretch, tension, fatigue Teeming with plenitude of cell reinforcements, iron and amino acids, Ashwagandha is utilized as a standout amongst the most effective herbs in Ayurvedic mending. While the old herb been mainstream in Ayurveda for its rest inciting capacities. Ashwagandha did not have its due in the worldwide domain yet not any longer.
A current review proposes the antiquated Indian herb can advance sound rest. The review is particularly imperative in the circumstances when such a variety of individuals over the globe are engaging a sleeping disorder and other dozing issue, for example, anxious leg disorder which are normal reason for worry among the moderately aged populace.
The group of analysts drove by Mahesh K. Kaushik, from the University of Tsukuba in Japan , found that the dynamic part that a dynamic segment of Ashwagandha (Withania somnifera) leaves - triethylene glycol (TEG) – works miracles to actuate rest, and could be seen changing the domain of common plant-based treatments for a sleeping disorder and rest related scatters.
The group concentrated the impact of different parts of Ashwaganda on resting examples of mice by recording electroencephalogram and electromyography and found that a water-based concentrate of the Ashwaganda rich in triethylene glycol (TEG), brought about an expanded non-quick eye development (NREM) rest and somewhat changed fast eye development (REM) rest. Indeed, even the financially accessible TEG likewise expanded the measure of NREM rest, additionally reinforcing their decision that TEG supported physiologically solid rest.
A standout amongst the most widely recognized neuropsychiatric issue of the world, Insomnia right now has 10-15 for each penny when all is said in done populace under its prey out of which 30-60 percent are from the moderately aged strata, according to the current evaluations. A sleeping disorder has additionally been connected with different ailments like corpulence, cardiovascular illnesses, despondency, uneasiness, madness shortfalls, and so on.

The manufactured medications accessible in the market accompanies its own symptoms, in such circumstances the rise of ashwagandha's expanded measure of rest actuating part TEG can be viewed as an appreciated alleviation for those searching for a sound rest without reactions.

इन घरेलू नुस्‍खों से दें वायरल फीवर को मात...

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वायरल का फीवर हमारे इम्यून सिस्टम को कमजोर कर देता है, जिसकी वजह से शरीर में इंफेक्शन बहुत तेजी से बढ़ता है. वायरल के संक्रमण बहुत तेजी से एक इंसान से दूसरे इंसान तक पहुंच जाता है.
आइए जानें, वायरल फीवर के लक्षण और इससे बचाव के घरेलू नुस्खे...
वायरल फीवर के मुख्य लक्षण
वायरल होने से वाले शरीर में कुछ इस तरह के लक्षण दिखते हैं जैसे, गले में दर्द, खांसी, सिर दर्द थकान, जोड़ों में दर्द के साथ ही उल्टी और दस्त होना, आंखों का लाल होना और माथे का बहुत तेज गर्म होना आदि. बड़ों के साथ यह वायरल फीवर बच्चों में भी तेजी से फैलता है.
इन घरेलू उपचार से आप इस इंफेक्शन से राहत पा सकते हैं...
1. हल्दी और सौंठ का पाउडर
अदरक में एंटी आक्सिडेंट गुण बुखार को ठीक करते हैं. एक चम्मच काली मिर्च का चूर्ण, एक छोटी चम्मच हल्दी का चूर्ण और एक चम्मच सौंठ यानी अदरक के पाउडर को एक कप पानी और हल्की सी चीनी डालकर गर्म कर लें. जब यह पानी उबलने के बाद आधा रह जाए तो इसे ठंडा करके पिएं. इससे वायरल फीवर से आराम मिलता है.
2. तुलसी का इस्तेमाल
तुलसी में एंटीबायोटिक गुण होते हैं जिससे शरीर के अंदर के वायरस खत्म होते हैं. एक चम्मच लौंग के चूर्ण और दस से पंद्रह तुलसी के ताजे पत्तों को एक लीटर पानी में डालकर इतना उबालें जब तक यह सूखकर आधा न रह जाए. इसके बाद इसे छानें और ठंडा करके हर एक घंटे में पिएं. आपको वायरल से जल्द ही आराम मिलेगा.
3. धनिया की चाय 
धनिया सेहत का धनी होता है इसलिए यह वायरल बुखार जैसे कई रोगों को खत्म करता है. वायरल के बुखार को खत्म करने के लिए धनिया चाय बहुत ही असरदार औषधि का काम करती है.
4. मेथी का पानी
आपके किचन में मेथी तो होती ही है. मेथी के दानों को एक कप में भरकर इसे रात भर के लिए भिगों लें और सुबह के समय इसे छानकर हर एक घंटे में पिएं. जल्द ही आराम मिलेगा.
5. नींबू और शहद
नींबू का रस और शहद भी वायरल फीवर के असर को कम करते हैं. आप शहद और नींबू का रस का सेवन भी कर सकते हैं.

सिर्फ 2 मिनट अपने अंगूठें में मारे फूंक, फायदे जान हैरान रह जाएंगे आप


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हेल्थ डेस्क: आज के समय में हर कोई अपना ठीक ढंग से ख्याल नहीं रख पाता है। जिसके कारण कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। आज हर एक व्यक्ति की यहीं समस्या है कि वो अनियमित खानापान और खराब दिनचर्या के कारण कई शारीरिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
खुद को हेल्दी रखने के लिए जरुरी है कि समय से हेल्दी खाना खाना, समय से सोना, योग, एक्सरसाइज आदि करना जिससे कि आप हमेशा फिट रहे, लेकिन समय के कारण ऐसा कुछ हो ही नहीं पता। है। इसलिए हम अपनी खबर में ऐसे उपाय के बारें में बता रहे है। जिससे आसानी से आप कई बीमारियों से निजात पा सकते है।
आज के समय में हम खाना खाकर सो जाते है। जिससे कि पेट संबंधी कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। जिसके कारण आपको बैचेनी आदि समस्या हो जाती है। इससे सिर्फ आप 2 मिनट में निजात पा सकते है। इसके लिए जब आपको काफी घबराहट-सी लग रही हो।
अगर आपके साथ कभी ऐसा हो तो अपने बाएं हाथ का अंगूठा अपने मुंह के सामने ले आएं और उसपर फूंक मारें। कम से 2-3 मिनट तक ऐसा करने से धीरे-धीरे आपकी बॉडी की तंत्रिकाओं में बदलाव आने लगेगा और आप शांत महसूस करने लगेंगे। यह एक बहुत ही बढ़िया ट्रिक है जो हमेशा काम करती है। किसी परीक्षा से पहले हो रही बेचैनी को खत्म करने के लिए इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।
आज के समय में हम खाना खाकर सो जाते है। जिससे कि पेट संबंधी कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। जिसके कारण आपको बैचेनी आदि समस्या हो जाती है। इससे सिर्फ आप 2 मिनट में निजात पा सकते है। इसके लिए जब…
ऐसे पाएं माइग्रेन पैन से निजात
अगर आपको माइग्रेन की प्रॉबल्म है, तो अपने अपने दाएं हाथ की तर्जनी अंगुली और अंगूठे के बीच के मांस को बाएं हाथ के अंगूठे और मध्यमा अंगुली की सहायता से पूरे दो मिनट के लिए दबाएं। यही तरीका दाएं हाथ के प्रयोग से बाएं हाथ पर भी दो मिनट के लिए आजमाएं। ऐसा करने से कुछ ही मिनटों में सिर का दर्द गायब हो जाएगा।

4 Amazing Benefits of Sleeping on the Left Side

You may have heard this counsel before and not gave careful consideration to it, but rather we thoroughly considere...